समस्तीपुर के बारे जानकारी | Samastipur Jila All Information

 

samastipur railway station

दोस्तो आज बात करने वाले है बिहार के केंद्र में मौजूद समस्तीपुर जिले की, समस्तीपुर का पुराना नाम सरैसा है। समस्तीपुर नाम मध्यकाल में बंगाल और उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास के नाम पर पड़ा है।

वही कुछ लोग ये भी मानते है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती हुआ करता था जो लोगो की जुबानी से फिसलता रहा,और कभी बदलकर सोम वस्तीपुर कभी समवस्तीपुर और आज समस्तीपुर हो गया।

समस्तीपुर जिला राजा जनक के मिथिला प्रदेश का हिस्सा रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह वैशाली गणराज्य का अंग बना। इसके बाद यह मगध के मौर्य, शुंग, कण्व और गुप्त शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। चीनी यात्री ह्वेनसांग के के लेखों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश हर्षवर्धन के साम्राज्य के अधीन हुआ करता था।

उत्तरी भाग ,,,,,,सुगौना के ओईनवार राजा के कब्जे में था ,,,जबकि दक्षिणी और पश्चिमी भाग शम्सुद्दीन इलियास के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है।

समस्तीपुर के उत्तर में दरभंगा, दक्षिण में गंगा नदी और बिहार की राजधानी पटना, पश्चिम में मुजफ्फरपुर और वैशाली, तथा पूर्व में बेगूसराय और खगड़िया जिले है।

इस क्षेत्र में मैथिली बोली बोली जाती है। मिथिला क्षेत्र के परिधि पर मौजूद ये जिला उपजाऊ कृषि प्रदेश है। पूर्व मध्य रेलवे का मंडल समस्तीपुर में मौजूद है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।

ये जिला 2904 वर्ग किलोमीटर के फैला हुआ है जो इंडोनेशिया के मुना आइलैंड के बराबर है,

2011 की जनगणना के अनुसार यहां 42 लाख 62 हजार लोग रहते है, जो अफ्रीका के कोंगो देश के बराबर है

ये जिला बिहार के सबसे डेंस्ड इलाको में से एक है, भारत की डेमोग्राफिक रिपोर्ट के अनुसार यहां 1 किलोमीटर में 1467 लोग रहते है

यहां का लिटरेसी रेट 61 प्रतिशत और लिंगानुपात 1000 पुरुषो पर 911 महिलाएं है, इस जिले की 52 प्रतिशत जनसंख्या हिंदी भाषा लगभग 31 प्रतिशत लोग और लगभग 9 प्रतिशत लोग उर्दू बोलने वाले है

समस्तीपुर में घूमने की जगह:-

1. सुराउली:
यह जगह समस्तीपुर के पास में ही मौजूद है यह जगह 400 साल पुरानी है यहां पर भव्य मंदिर बना हुआ है जहां पर सरस्वती माता की पूजा की जाती है,इस स्थान को देखने के लिए भी दूर दूर से लोग आते हैं यहां पर भव्य मेले का आयोजन भी होता है। जो कि साल में एक बार ही होता है और इस मेले में भारत के कोने कोने में से लोग आकर हिस्सा लेते हैं


2.मंगलगढ़:
समस्तीपुर जिले में मंगल गढ़ के नाम से भी एक जगह है जो हिंदू धर्म के लोगों के लिए बहुत ही खास महत्व भी रखती है मंगल गढ़ वही स्थान है। जहां पर भगवान बुद्ध ने बौद्ध धर्म के लिए उपदेश दिए थे इसीलिए बौद्ध धर्म के लोग भी यहां पर रोजाना देखने को मिलते हैं, लोग इस स्थान पर दुनिया के कोने कोने से आते हैं।

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